Thursday, November 12, 2009
मेरे इस ब्लॉग की उददेश्य ये जानने की कोसिस है की आज साहित्य का जीवन पर कितना प्रभाव है । मुझसे हमेसा पुछा जाता है की इस साहित्य का क्या मतलब आप कोर्स के लिए पढ़ते है या इसका कुछ और मतलब भी है ......मै ये मनाता हूँ हमेसा की साहित्य मानव को इन्सान बनता है जो की आज ही नही अपितु हर समय एक जटिल चीज मानी जाती रही है ग़ालिब ने लिखा है की"आदमी को भी मुयस्सर नही इन्सान होना "
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naye sal ki dher sari shubhkamnaye
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